Friday, 18 January 2019

उरी - चलचित्र समीक्षा


ऋषि बब्बर द्वारा लिखित | १९ जनवरी २०१९

 ॥ उरी - अति उत्तम चलचित्रम्  

 
...युँ तो मैं हर चलचित्र का विश्लेशण अथवा समीक्षा नहीं लिखता, परन्तु जब फ़िल्म इतनी दमदार और जोशीली हो, तो मेरी उंगलियाँ संगणक के कुंजीपटल पर चलने को आतुर हो जातीं हैं ।
उरी फ़िल्म देखने पश्चात दर्शक के हृदय में देशभक्ति की भावना प्रबल हो उठती है एवं जय हिन्द’, ‘वन्दे-मातरम्के नारे पुकारने को जी करता है ।
 
११ जनवरी २०१९ से चित्रालयों में प्रदर्शित यह फ़िल्म, २८-२९ सितम्बर २०१६ में पाकिस्तान को दिए गए करारे जवाबी आक्रमण पर आधारित है । १८ सितम्बर २०१६ को प्रात: ५:३० बजे पाकिस्तान की ओर से ४ आतंकिओं ने भारतीय सीमा में कश्मीर के उरी क्षेत्र में प्रवेश कर, १९ निद्राकृष्ट भारतीय सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया था – जिसके फल स्वरूप भारत की ज़िम्मेदार सरकार ने ऐसा कठोर निर्णय लिया । 
 
उरीजैसी एक विश्वस्तरीय फ़िल्म का निर्माण कर निर्माता रौनी स्क्रूवाला और निर्देशक आदित्य धर ने एक अविश्वस्नीय कार्य कर दिखाया है, जोकि अतुल्य है । सामान्यत: भारतीय चलचित्र उद्योग जगत में ऐसी फ़िल्में बहुत ही कम बनतीं हैं जिनमें किसी भी विभाग में कोई भी कमी ना हो । ऐसा प्रतीत ही नहीं होता कि यह निर्देशक आदित्य धर की पहली फ़िल्म होगी!
 
आदित्य धर जी का निर्देशन एवं शाश्वत सचदेव का उपयुक्त संगीत और परिप्रेक्ष्य गीतों ने इस फ़िल्म को भारतीय फ़िल्म जगत का एक अन्मोल रत्न बना दिया है जो आज हम सिनेमाघरों में बड़े गर्व से अनुभव कर सकते हैं । निश्चित रूप से यह फ़िल्म राष्ट्रीय पुरुस्कार की हक़दार है । क्योंकि हमें ज्ञात है कि यह एक सच्ची घटना पर आधारित है इसलिए इसे परदे पर छायांकित करने हेतु किसी कहाँनी की आवश्यक्ता थी, जिसे आदित्य जी ने बहुत ही उमदा तरीके से पिरोया है ।
 
 फ़िल्म में गीत और परिप्रेक्ष्य संगीत का निर्माण किया है शाश्वत सचदेव ने । सभी ५ गीत अति मधुर हैं और मुझे अत्यंत ही प्रीय हैं तथा सभी गीत फ़िल्म के परिप्रेक्ष्य में हैं । आप अभी गीतों को सुनने हेतु कृपया यहाँ जाएं : https://gaana.com/album/uri-the-surgical-strike ...
 
प्रारम्भ से अंत तक यह फ़िल्म दर्शकों को बांधे रखती है तथा दर्शक अपनी कुर्सी पर टस से मस नहीं होते; सिवाए अंतराल के । उरी चलचित्र का चित्रण मुम्बई और सरबिया देश में किया गया है, जहाँ पर कश्मीर जैसी वादियाँ, गुफ़ाएं , झील व नदी आदि हैं । फ़िल्म के दृश्य मितेश मीरचंदानी द्वारा छायांकित हैं अथवा शिवकुमार पणिकर का सम्पादन पूर्ण्त: तीक्षण है। इस फ़िल्म का छायांकन जून २०१८ से सितम्बर २०१८ के बीच हुआ । मुख्य भूमिका के लिए विकि कौशल ने ५ महीने शारीरिक अभ्यास किया तथा मुम्बई के जल सेना विभाग में एक फौजी समान बंदूक चलाने की भी ख़ास सीख गृहण करी । अन्य कलाकारों की सिख्या भी मुम्बई में नेवी नगर में हुई ।  
 
उरीके निर्माण में कुल रूपए २५ करोड़ की पूंजी क्षय हुई है और अब जब आप यह लेख पढ़ रहे हैं तो यह १०० करोड़ से कहीं अधिक का आंकड़ा पार कर चुकी होगी । फ़िल्म का निर्माण रौनी जी और उनकी आर. एस. वी. पी मूवीज़ द्वारा किया गया है एवं इसे विस्त्रित किया है ज़ी स्टूडिओज़ ने । उरी लगभग सवा दो घंटे लम्बी है ।
उरीचलचित्र के पात्रवर्ग इस प्रकार हैं:-
विकि कौशल – मेजर विहान सिन्ह शेर्गिल
परेश रावल – गोविंद भारद्वाज 

यामी गौतम – पल्लवी शर्मा
मोहित रैना – मेजर करण कश्यप
मानसी पारेख – नेहा कश्यप
कीर्ती कुल्हारी – कप्तान सीरत कौर 
रजित कपूर – प्रधान मंत्री मोदी
योगेश सोमन – रक्षा मंत्री मनोहर परिकर
आदि... ।
 
सारांश में कहाँनी कुछ इस प्रकार है –
भारतीय थल सेना में मेजर विहान शेर्गिल एक निडर फौजी हैं जो अपनी माता जी, जिन्हें भूलने की बीमारी है, का ख्याल रखने हेतु सेना से जल्द ही निवृत्त होना चाहते हैं । 
 
परंतु जब प्रधान मंत्री महोदय इस बारे में प्रबुध्द होते हैं तो वे मेजर शेर्गिल, जोकि पहले मयन्मार सीमा पर स्थित थे, का तबादला दिल्ली में करा देते हैं । मेजर विहान की बहन नेहा, उनके पति मेजर करण कश्यप और बेटी सुहानी के साथ सुखमय जीवन व्यतीत करती हैं। 
 
फ़िर समाचार आता है कि उरी कश्मीर में एक आतंकी हमले में १९ सेना के जवान वीरगति को प्राप्त हो गए, जिसमें मेजर करण भी शामिल थे । पाकिस्तान के ऐसे कायरतापूर्ण कदम पर सभी जवानों का ख़ून खौल्ता है और भारत मूँह तोड़ जवाब देने की तैयारी करता है । ठीक ११ दिनों में उरी क्षेत्र से भारतीय सेना, मेजर विहान के नेतृत्व में, पाकिस्तान अधिवासित कश्मीर में २९ सितम्बर रात्रि २.३० बजे घुस कर, आतंकीय संगठनों के अड्डों को तबाह करती है । 
 
फ़िल्म के दौरान हमे कई बातें सीखने मिलतीं हैं जैसे कि छोटे-ड्रोन जहाज़ो का उपयोग और इसरो द्वारा उपग्रह से सांझा की गयी जानकारी, आदि ।
 

 उरी के चर्मोत्कर्श में सिनेमा घरों में खूब सिटियां बजतीं हैं जहाँ हवाबाज़ कप्तान सीरत कौर जवानों को बचाने हेतु हेलिकौप्टर से, पाकिस्तानियों पर मशीन गन से गोलियों की बौछार करती है । 
 
इस फ़िल्म को एक कहाँनी मे पिरोना आदित्य जी के लिए कोई आसान काम नहीं था । जब वे २०१७ में सर्वोच्च सेना अधिकारी के पास गए थे, तो उन्होंने आदित्य को बताया की उनसे पहले भी कई लोग आए थे यह फिल्म लेकर , किंतु किसी के पास अच्छी कहाँनी नहीं थी । 
 
पट्कथा, संवाद व लेखन का सबसे अच्छा हिस्सा यह रहा कि यह आपका ख्याल कहीं और जाने नहीं देता ( जैसे कि मोबाइल फोन, आदि ) और आप पात्रों से जुड़े रहते हैं और उनकी पीड़ा महसूस कर सकते हैं। 
 
फ़िल्म में ऐसे कई ध्यान आकर्शित करने वाले क्षण हैं कि दर्शक बिना पल्कें झप्काए देखते व सोचते रहते हैं कि,  अब क्या होगा – हालांकि पता है कि सच में क्या हुआ था । उरीचलचित्र में सभी कलाकारों ने उत्कृष्ट कला का नमूना प्रस्तुत किया है, जिससे नए अभिनेता सीख ले सकते हैं । 
 
इस फ़िल्म में देशभक्ति की भावना बहुत गहराई में छुपी हुई है, जिसे सभी दर्शकों ने सराहा है। मैं अपने सह-देश्वासियों से आग्रह करूंगा कि यदि आप अपनेआपको भारतीय कहल्वाने का गौरव महसूस करना चाहते हैं, तो आपके लिए उरीचलचित्र चित्रालय में देखना अत्यंत ही अनिवार्य है । 
वैसे आपकी जानकारी हेतु यह बता दूँ कि इस फ़िल्म की नकली प्रतिलिपि इंटर्नेट पर मौजूद नहीं है, क्योंकि यह नया हिंदुस्तान है, यह टौरेंट में घुसेगा भी और पाइरसी रोकेगा भी ।




इस समीक्षा को पूर्ण पढ़ने हेतु पाठक को मेरा असीम धन्यवाद ।

Howz the जोश ?
...High Sir
Howz the जोश ?
...High Sir
जय हिन्दजय हिन्द
जय हिन्दजय हिन्द
॥ वंदे-मातरम् ॥
http://ऋषीबब्बर.भारत
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Thursday, 3 January 2019

True Home...

Sooner or later we will realise that there is no place on this planet that we call – HOME…!!
 
The True home is one where we have ‘everything’ and the resident does not need to leave the place ever to get anything from ‘outside.’
 
True home is one which is beyond time, matter and space in the highest realms of consciousness.
 
True home is one which is not a rented house; from where no one can kick us out of ever for eternity.
 
True home is in the lap of the creator of the universe, the divine ocean of love, peace and bliss which is truly everlasting.

-@Rishi_Babbar, 3 January 2019, Mumbai, India

Tuesday, 25 December 2018

BIRTHDAY of the ‘AVATAR’ of GOD

“If we can't reach our destination by simply reciting a railway or airways timetable,
then how can we reach our true house of Lord by merely reading a Holy book??!!

If we can't satisfy our hunger by simply reading the recipe book daily,
then how can we satisfy the urge of our soul to meet its beloved
Lord by reading spiritual scriptures day and night??!!

If we can't cure our bodily diseases by only reading the prescriptions by the Doctor or books of medical science regularly,
then how can we cure the disease of illusion from our mind and soul by every day repeating the books by the ‘Divine Doctors’ like a parrot??!!

And last but not the least...

If can't become a scientist by never going to school ever but only celebrating the ‘Birthday of Einstein’ every year,
then when and how can we ourselves become divine, holy, spiritual or delete our karma by merely celebrating the ‘Birthday of the Great Saint(s) - The AVATAR(s) of GOD’??!!
 

Why do we take life for granted??

Why aren't we truly serious about our soul’s ultimate evolution in the creation??

Why aren’t we planning to get out of this foolish domain of time, matter and space and the futile worldly pursuits??

We are grownups … not kids…
PONDER…!!”


-@Rishi_Babbar, Mumbai, India,
25 December 2018, 23:40 hrs IST

Saturday, 22 December 2018

“Director himself the Best Actor”

It is a great secret that the director of
the creation (God) is himself the best actor
here on the stage of Life on earth,
because he descends to this planet in the form
of a living perfect Master or a saint, who is
embodiment of the Lord himself.
Since the creation is created,
he has been coming on this
stage in the garb of a human being to
collect his marked allotted souls as per
their time and reveals his true identity to them.
At the same time acts as a normal human being
to keep the unmarked souls under the delusion
so that they don’t get attracted to him by
his spiritual radiance as their time to
return home has not yet arrived.
He even keeps the ‘slanderer’ posted
as ‘guard’ to drive those souls away from himself!
-@Rishi_Babbar
20 December 2018, Mumbai, India