Tuesday, 3 July 2018

संजु - चलचित्र समीक्षा

ऋषी बब्बर द्वारा लिखित  |  ४ जुलाए २०१८  (पुन: प्रकाशित १७ जुलाए २०१८)

संजु फ़िल्म २९ जून २०१८ से सिनेमा-घरों में प्रदर्शित है तथा प्रसिद्ध अभिनेता संजय दत्त के जीवन पर आधारित है । 



राजकुमार हिरानी का निर्देशन तो अतुल्य है ही अथवा उनकी इस पाँचवी फ़िल्म के साथ तो उन्होंने दर्शकों के समक्ष एक श्रेश्ठतम् कार्य का नमूना भी प्रस्तुत किया है । 


 अब तक संजु ने दुनिया भर में ३५० करोड़ रुपए का आँकड़ा पार कर लिया है, जोकि आश्चर्यजनक बात है!

संजु का निर्देशन, छायांकन, कहाँनी, सम्वाद और लेखन बहुत ही उपयुक्त हैं २ १/२ घंटों की फ़िल्म के लिए । कई लोग कहने लगे कि कुछ बातें तो फिल्म में दिखाई ही नहीं गईं हैं, ऐसा क्यों? इसका उत्तर यह है कि ढ़ाई घंटों में जितना संकुचित हो सकता था वह राजकुमार और अभिजात जी ने किया ; सारा जीवन तो परदे पर नहीं उतारा जा सकता ! फ़िर यह भी कहा गया की यह फ़िल्म संजय के जीवन को पूर्ण सच्चाई से प्रस्तुत नहीं करती अथवा कुछ बातों को छुपाया गया है । 


यह तो आप फ़िल्म देखने उप्रांत अंदाज़ा लगा सकते हैं कि कितनी सच्चाई से इस कहानी को कहा गया है । सत्य तो यह है कि आज के नौजवानों को इस फ़िल्म से यह सीख तो अवश्य ही मिलती है कि जीवन में कौनसी ग़लतियों से बचना है, यानी क्या नहीं करना है और क्या करना चाहिए याँ आवश्यक है । 


यह ढ़ाई घंटों में हमें फ़िल्म यह सिखाती है कि हमें अपनी ज़िंदगी में किन बातों से हर दम बचना व सचेत रहना चाहिए; ताकि हम वह ग़लतियां ना दोहराएं जो संजु ने की हैं, यदि हम समझदार हैं तो । फ़िल्म में कहा गया है कि, सच तो आख़िर मनुष्य के हृदय में होता है, हमें लोगों की परवाह नहीं करनी चाहिए क्योंकि किसी उस्ताद ने ख़ूब  कहा है कि, “कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना.....।”

इस चलचित्र के दृश्य रवी वरमन द्वारा छायांकित हैं अथवा राजकुमार हिरानी ने स्वयं ही इसे सम्पादित किया है। संजु का निर्माण विधु विनोद चोपड़ा और राजकुमार हिरानी  द्वारा किया गया है तथा इसका वितरण फ़ोक्स स्टार  स्टूडिओस द्वारा किया गया है । फ़िल्म का छायांकन जनवरी २०१७ से जनवरी २०१८ तक हुआ । 


संगीत संजय वांद्रेकर और अतुल रनिंगा का है एवं अन्यसंगीतकार जैसे रोहन, विक्रम मोंत्रोस, ए आर रहमान ने भी कुछ गीतों को मधुरता प्रदान करी है । सुख्विंदर सिन्ह का गाया गीत “कर हर मैदान फतेह ... ओ बंदेया ...”  काफ़ी प्रसिद्ध हो चुका है ।


संजु चलचित्र के पात्रवर्ग इस प्रकार हैं:-
रण्बीर कपूर - संजय दत्त (संजु)
परेश रावल – सुनिल दत्त
विक्की कौशल – कम्लेश कन्हैयालाल कपासी
मनिशा कोएराला – नर्गिस दत्त
दीया मीर्ज़ा – मान्यता दत्त
सोनम कपूर – रूबी 



अनुष्का शर्मा – विनि डाएज़
जिम सर्भ – ज़ूबिन मिस्त्रि
बोमन इरानी – रूबी के पिता
सयाजी शिंदे – बंडु दादा
अदिति गौतम – प्रिया दत्त
आदि... ।





सारांश में कहाँनी कुछ ऐसी है – फ़िल्म के प्रारम्भ में संजु, जो कि एक नौजवान अभिनेता है, अपने पिता सुनील दत्त द्वारा निर्देशित अपनी पहली फ़िल्म के सेट पर है और मुश्किल ही से एक शौट दे पाता है । ज़ुबिन मिस्त्रि जो कि एक ड्रग डीलर है, संजु को छुप-छुप कर ड्रग्स देता है और उसे इसकी लत लगा देता है । 


इसी दौरान नर्गिस दत्त जिन्हें कर्क-रोग है, अपने इलाज हेतु सह-परिवार अमरीका जातीं हैं । इस समय संजु की भेंट कम्लेश के संग होती है जोकि उनके घनिष्ट मित्र बन जाते हैं । 


यह जान कर कि संजु एक नशाख़ोर बन चुका है रूबी के पिता उसका विवाह किसी और के साथ तय कर देते हैं । 
अब नर्गिस जी की मृत्यु और रूबी के साथ रिश्ता टूटने उपरांत 


सुनील दत्त साहब संजु को नशामुक्ति केंन्द्र छोड़ आते हैं और वह वापस ठीक-ठाक भारत लौट आता है । 


सुनील दत्त साहब संजु और कम्लेश की गहरी मित्रता के विषय में भी जान चुके होते हैं । फ़िर १९९३ बम्बई में हुए बम-धमाकों के पश्चात संजु को पुलिस ग़ैर-कानूनी हथियार रखने के जुर्म में गिरफ़्तार कर लेती है । 


यह जान कर दत्त साहब और उनका परिवार बहुत दुःखी होता है और संजु को ज़मानत पर छुड़ा  लिया जाता है । लेकिन फ़िर संजु पर इल्ज़ाम लगता है कि धमाकों में प्रयोग विस्फोटक पदार्थ संंजु के ही घर पर था


किंतु सच्चाई कुछ और होती है जो यहाँ नहीं बताएंगे क्योंकि फ़िर फ़िल्म देखने का लुफ़्त खो जाएगा । 


फ़िर आगे चल कर संजु को ५ साल की जेल होती है और अंदर कैसे उनका जीवन बीता यह सब फ़िल्म में दिखाया गया है । जेल जाने से पूर्व संजु विनि नाम कि एक लेखक से मिलते हैं और उसे अपनी जीवनी लेखने को कहते हैं । 



इस चलचित्र में सभी कलाकारों ने उत्कृष्ट कार्य का नमूना दिया है। फ़िल्म के चर्मोत्कर्श में दर्शक के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है जब अंत में संजय दत्त और रण्बीर कपूर एक साथ एक गीत में दृश्यमान होते हैं ।



इस फ़िल्म में दो मित्रों का एवं बाप-बेटे का जो रिश्ता दिखाया गया है उसे हिरानी जी ने बहुत ही ख़ूबी से फ़िल्माया है । फिल्म में हंसी-मज़ाक के दृश्य भी हैं जोकि बहुत मज़ेदार हैं । संजय वांद्रेकर और अतुल रानिंगा का परिप्रेक्ष्य संगीत काफ़ी असरदार है जोकि हिरानी जी कि हर फ़िल्म में सुनने मिलता है । इर्शाद कामिल, पुनीत शर्मा, शेखर अस्तित्व,रोहन गोखले और अभिजात जोशी के गीत व लेखन बहुत ही सराहनीय है । 


अंत में देखा जाए तो संजु फ़िल्म कई हफ़्ते चलेगी, जैसा कि किसी भी असरदार फिल्म के साथ होता है कि दर्शक टिकट लेकर दुबारा जाते हैं सिनेमा घरों में, ऐसा ही कुछ हमें संजु के साथ देखने मिल रहा है । 



क्या संजु बाहुबली २ के हिंदी संस्करण को पछाड़ सकेगी ? क्या पता कि जब तक आप यह पृष्ठ पढ़ें यह फिल्म २०० कोटि रुपए से अधिक कमा ले !


इस समीक्षा को पूर्ण पढ़ने हेतु पाठक को मेरा असीम धन्यवाद ।
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